इंजीनियरिंग की, बाद में तपस्या और बन गए नागा साधु

LiveUjjainNews 22:24:11,20-Mar-2016 सिंहस्थ
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उज्जैन .आईआईटी पास इंजीनियर को जब वैराग्य हुआ तो वह लाखों की संपत्ति दान कर नागा साधु बन गया। अब वह नागा साधुओं की टोली के साथ घूमते हैं। उन्होंने जीवन में किसी को दोस्त भी नहीं बनाया था।
-मनुष्य को वैराग्य हो जाए तो धन-संपत्ति सबकुछ बेकार हो जाता है।
-अच्छे परिवार में जन्म लेने आैर आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद पंजाब के पवन भारती के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
ऐसी है इंजीनियर से साधु बनने की कहानी...
-फरीदकोट (पंजाब) के कोटकपुरा में 57 वर्षीय पवन भारती का जन्म हुआ था।
-पिता पीएनबी में मैनेजर थे आैर माता कॉलेज में लेक्चरर।
-पवन भारती ने आईआईटी कानपुर से मेकैनिकल में 1984 में इंजीनियरिंग पूरी की। इसके बाद खुद भी अच्छी कंपनी में काम पर लग गए।
-पवन भारती बताते हैं कि उन्होंने कभी अपना कोई दोस्त नहीं बनाया। माता-पिता ही उनके दोस्त थे।
-वर्ष 2000 में बीमारी से पिता की मृत्यु हुई आैर तीन माह बाद ही माता ने भी दम तोड़ दिया।
-माता-पिता की मौत का उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा।
-मस्तिष्क में ब्लैक होल जैसी स्थिति हो गई।
-पटना से एक स्टेशन पहुंचे तो पता ही नहीं था कि अब कहां जाना है।
-वहां एक बुजुर्ग दंपती को काशी का टिकट लेते देखा तो खुद भी काशी का टिकट लेकर काशी पहुंच गए। इसके बाद उन्हें वैराग्य हो गया।
-मकान-जमीन सहित लाखों की संपत्ति रामकृष्ण मिशन को दान कर संन्यास ले लिया।
-नागा साधु बनने के लिए 10 साल तक ब्रहृाचर्य की तपस्या की आैर वर्ष 2010 में हरिद्वार में दीक्षा ली।
-पवन भारती अब पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के बाबा हैं।

सुसाइड समाधान नहीं, आध्यात्म से विल पावर को मजबूत करें विद्यार्थी
-वर्तमान में युवाओं के सुसाइड करने की बढ़ती घटनाओं पर पवन भारती बाबा ने कहा फेल हो जाने या अन्य कारणों से युवा जल्दी फ्रस्ट्रेशन में आ जाते हैं।
- सुसाइड किसी समस्या का समाधान नहीं है। व्यक्ति मेंटल फ्रस्ट्रेशन से जुड़ता है तो केवल आध्यात्म का रास्ता ही खुला होता है। इसी से मानसिक शांति मिलती है।
- सुसाइड करने की बजाय विद्यार्थी आैर युवा अपने विल पावर को मजबूत करें।
- आज समाज में कम्युनिकेशन गैप भी हो गया है। माता-पिता भी बच्चों से जुड़े रहें आैर उनकी परेशानियों को साझा करें।
कौन होतेहैं नागा साधु
- नागा संन्यासी कौन होते हैं, कैसे बनाए जाते हैं, नागा साधु बनने के लिए क्या कुछ करना पड़ता है, इन सवालों के जवाब जूना अखाड़ा की धार्मिक विधियां संपन्न कराने वाले पंडित शैलेंद्र वधेका और नरेन्द्र गिरी जी महाराज ने दी।
- नागा साधुओं की ट्रेनिंग सेना के कमांडो की ट्रेनिंग से भी ज्यादा कठिन होती है, उन्हें दीक्षा लेने से पूर्व खुद का पिंड दान और श्राद्ध तर्पण करना पड़ता है।
- पुराने समय में अखाड़ों में नागा साधुओं को मठों की रक्षा के लिए एक योद्धा की तरह तैयार किया जाता था।
- मठों और मंदिरों की रक्षा के लिए इतिहास में नागा साधुओं ने कई लड़ाइयां भी लड़ी हैं।

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