मंगल नाथ मंदिर

LiveUjjainNews 12:03:09,05-Mar-2016 उज्जैन दर्शन
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दिव्य शिप्रा के तट पर मंगल नाथ मंदिर मत्स्य पुराण के अनुसार मंगलनाथ परिसर को मंगल का जन्म स्थान माना गया है | मंगलनाथ भगवान शिव के ही रूप है । मंगलनाथ मंदिर कर्क रेखा पर स्थित है और इसे भारत वर्ष का नाभि स्थल भी कहा जाता है |यह परिसर अपने दैवीय गुणों के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है |मंगल (Mars), नौ ग्रहों में से एक ग्रह है. मंगल (Mars) अंगारक तथा कुज के नाम से भी जाना जाता है. वैदिक एवं पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान मंगल की माता पृथ्वी देवी है | वह शक्ति, वीरता और साहस के साथ जुड़ा हुआ है |

 

मंगल ग्रह शक्ति, वीरता और साहस का परिचायक है तथा स्वामी मंगल के जीवन का उद्देश्य धर्म की सुरक्षा है | भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वामी मंगल के चार हाथ है, और हथियार के रूप में त्रिशूल और गदा वहन करते है. वह लाल गहने पहनते है | भगवान मंगल की पूजा से त्वचा की बीमारियों, कर्ज और गरीबी से मुक्ति मिलती है | स्वामी मंगल का रत्न मूंगा है जो लाल होता है, और उसका दिन मंगलवार है तथा वह दक्षिण दिशा के संरक्षक है |

 

मंगल नाथ मंदिर में श्रद्धालु मंगलदोष तथा कालसर्प दोष का निवारण करने आते है ।मंगल नाथ मंदिर में भगवान मंगलनाथ का प्रत्येक मंगलवार को भातपूजन किया जाता है। मंगलनाथ मंदिर पर कालसर्प दोष शांति, केतु शांति, मंगल गृह शांति, नव गृह जाप , भात पूजा , महा मृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक, नव गृह शांति , शनि गृह जाप , शनि गृह शांति , राहु शांति आदि करने का विधान है ।

 

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