राम जनार्दन

LiveUjjainNews 17:04:54,03-Mar-2016 उज्जैन दर्शन
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अंकपात क्षेत्र में स्थित यह मंदिर अपने स्थापत्य , शांत वातावरण के साथ सुंदरता के लिए भी जाना जाता है । मूल रूप से यह सप्त सागरों स्थान रखने वाले अतिप्राचीन विष्णु सागर के तट पर स्थित एक परकोटे पर निर्मित है । जिसमे एक राम मंदिर व दूसरा जनार्दन (कृष्ण ) मंदिर है ।यहाँ पर परमार कालीन गिरिधर कृष्ण ,शेषशायी ब्रह्मा , विष्णु तथा महेश की सुन्दर प्रतिमाऐं भी है|राम मंदिर में राम लक्ष्मण और सीता की अति प्रचीन प्रतिमाएं तथा जनार्दन –विष्णु की भी प्रतिमाए उसी दौर की है| जो कि सत्रहवी शताब्दी की है| कला की द्रष्टि से दोनों ही मंदिर भव्य बने हुवे है|मराठाकालीन चित्रों के सुंदर उदाहरण दोनों ही मंदिर की दीवारों अंकित है| राम एवं कृष्ण की लीलाओं के मनोहारी द्रश्यों के अलावा बोदल्या बुआ महाराज एवं संत  तुकोबा आदि के चित्र भी बहुत प्रभावशाली है| दोनों मंदिरों में तथा जनार्दन मन्दिर के सामने कुण्ड के पास कुछ पुरातन प्रतिमाएं प्रतिष्टित है| जो शिल्क के द्रष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है| कुण्ड के निकट गोवर्धन कृष्ण की प्रतिमा ग्यारहवी शताब्दी की है| राम मंदिर के सभा –मण्डप तथा गर्भगृह के बीच शेषशायी विष्णु की प्रतिमा दसवी शताब्दी की तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेस की प्रतिमाएं बारहवी शताब्दी की है| 

 

विशेष रूप से श्रीकृष्णा जन्माष्टमी और रामनवमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है । इस मंदिर का निर्माण राजा जयसिह ने करवाया था । कालांतर में मराठाकाल में परकोटा और कुंड निर्मित किये गए । यहाँ कई देवी देवताओ के चित्र और करीब १८०५ ईस्वी का शिलालेख अभी अंकित है ।

 

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