हरसिद्धि माता

LiveUjjainNews 17:00:27,03-Mar-2016 उज्जैन दर्शन
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५१ शक्तिपीठों में से एक माता हरसिद्धि का मंदिर महाकाल मंदिर से पश्चिम की ओर प्राचीन रूद्रसागर के पार ऊँचे स्थान पर स्थित है । हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन के देवी मंदिरों में शहर का एक महत्वपूर्ण मंदिर है।इस जगह का पुराणों में बहुत महत्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव सती के शरीर को ले जा रहे थे, तब उसकी कोहनी इस जगह पर गिरी थी।

 

माना जाता है कि माता हरसिद्धि सुबह गुजरात के हरसद गांव स्थित हरसिद्धि मंदिर जाती है तथा रात्रि विश्राम के लिए शाम को उज्जैन स्थित मंदिर आती है, इसलिए यहां संध्या आरती महत्त्व है ।तांत्रिक ग्रन्थ महाकाल- सहिंता(तृतीय खंड ) में इस मात्र -शक्ति को हरसिद्धि नाम से जाना जाता है |इस्कंद पुराण के अनुसार हरसिद्धि के मंदिर में महिष –बलि दी जाती थी| मंदिर के गर्भगृह में शिला पर श्रीयंत्र उत्कीर्ण है | हरसिद्धि देवी इसी श्रीयंत्र विग्रह क्र रुप में प्राण-प्रतिष्ठित है| माता अन्नपूर्णाके आसन के निचे सैट प्रतिमाओं में मध्य कलिका तथा पश्र्व्वार्तिनी महालक्ष्मी ओर महासरस्वती विराजितहै| माता हरसिद्धि की साधना से समस्त प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है । इसलिए नवरात्रि में यहां गुप्त साधक साधना करने आते है।                                           

 

मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर भैरवजी की मूर्तियां है । गर्भगृह में तीन मूर्तियां है । सबसे ऊपर अन्नपूर्णा , मध्य में हरसिद्धि तथा नीचे माता कालका विराजित है । माँ को तत्कालीन सम्राट और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी कहा जाता है। किवदंती है कि यहाँ देवी को विक्रमादित्य द्वारा प्रसन्न करने के उद्देश्य से करीब 10 बार अपना शीश चढ़ाया गया है।

 

इस मंदिर का पुनर्निर्माण मराठों के शासनकाल में किया गया था, अतः मराठी कला की विशेषता दीपकों से सजे हुए दो खंभों पर दिखाई देती है।मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुँआ है तथा मंदिर के शीर्ष पर एक सुंदर कलात्मक स्तंभ है। इस देवी को स्थानीय लोगों द्वारा बहुत शक्तिशाली माना जाता है।

 

 

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